अधूरी मोहब्बत
कुछ लोगों की जिंदगी पल भर में रेत की तरह बिखर जाती हैं तो कोई उसी पल अपनी जिंदगी को नयी दुल्हन की तरह सजा लेता है। स्कूल का वो दौर था और बोर्ड कक्षा का माहौल था, लेकिन उसी कक्षा में कोई अपनी ही धुन पर सवार था। उसे न अपने एग्जाम की चिंता थी न मार्क्स की। यूं तो स्कूली शिक्षा का वह आखरी साल था लेकिन प्यार की कक्षा में उसने अपना पहला कदम अभी अभी ही रखा था। लेकिन इधर उसे उसकी जिंदगी में किसी तूफ़ान के आने के पहले की खामोशी का आभास तक नहीं था। प्यार का परवान सर चढ़ कर बोल रहा था। छः घंटे की कक्षा की पीरियड में प्यार की एक्स्ट्रा क्लास भी लगने लगी थी। इश्क़ का खुमार इतना बढ़ने लगा कि ब्लैक बोर्ड पर पढ़ा रहे लेक्चर क्लास की थ्योरी से ज्यादा फर्स्ट बेंच पर बैठी उसके चेहरे की मासूमियत पर ध्यान था।
आग दोनों तरफ लगी थी तो जाहिर सी बात है कि आग के दोनों सिरों को मिलना ही था। एक दिन लंच से पहली की कक्षाएं समाप्त होने के बाद उसे उसने बगल वाले प्रैक्टिकल रूम में बुलाया। गोमंती पहले से ही प्रैक्टिकल रूम में पहुंच चुकी थी और औरंगजेब के जमाने से पड़े सल्फ्यूरिक अम्ल की बोतल को बड़े ध्यान से देख रही थी तभी आदित्य किसी फिल्मी हीरो की तरह रूम में घुसा उसे देखते ही हाथ में पकड़ी बोतल झट से रख दी और डर गई। आदित्य को उसके चेहरे का डर साफ नजर आ रहा था लेकिन शायद वह भी उससे कहीं अधिक डरा हुआ था। पर वो जो कहते है ना की जब ओखली में सर दिया तो मुसली से क्या डरना उसने अपने कदम आगे बढ़ाए। जैसे जैसे आदित्य अपने कदम आगे बढ़ता वैसे वैसे गोमती अपने कदम पीछे कर लेती। लेकिन कब तक पीछे करती पिछे दीवार से लगे आलमारी से वह चिपक गई आदित्य ने इसी का फायदा उठाया और उसके एकदम करीब आ गया यह पहला मौका था जब दोनो एक दूसरे के इतने करीब थे। आदित्य अपना काम बखूबी करके वहां से चला गया।
गोमती सन्न रह गई उसने उस दिन न किसी से कुछ कहा न किसी से कोई बात की। आदित्य को उसका डरा चेहरा देखकर थोड़ी घबराहट जरूर हुई लेकिन घर पहुंचते ही सब ठीक हो गया। अब शुरुवात हो चुकी थी एक्स्ट्रा क्लास लगाने की। स्कूल टाइम से हमेशा लेट रहने वाला आदित्य अब समय से एक घंटा पहले ही स्कूल पहुंचने लगा। बस दोनो स्कूल के ताले खुलने के इंतेजार में रहते फिर जिस रूम को सुना पाते वही शुरू हो जाते। स्कूल का ऐसा कोई सा भी दीवार दोनो ने नहीं छोड़ी।
दोनो की जोड़ी स्कूल के जमाने की हिट जोड़ी बन गई पूरे स्कूल में दोनो के चर्चे जोरो शोरो तक होने लगे यहां तक की बात स्कूल के टीचरों तक भी पहुंचने लगी। लेकिन दोनो इस बात से कोई मतलब नहीं है दोनो अपना काम बखूबी निभा रहे थें। समय बीतता गया एग्जाम नजदीक आ गए। जहा बाकी स्टूडेंट के हाथो में किताब होते थे वहीं दोनो रात को कम्बल ओढ़कर एक दूसरे का मैसेज पढ़ा करते थे । प्यार की पढ़ाई पर दोनो का जबरजस्त ध्यान था। एक चैप्टर को छोड़ कर बाकी सभी का रिवीजन कर चुके थे। जो चैप्टर छूटा हुआ था उसे गोमती ने मौका देख आदित्य को अपने घर बुलाकर पूरा कर लिया।
दोनो को यह चैप्टर बहुत ही ज्यादा पसंद आने लगा इसलिए अब मौका मिलते ही आदित्य का गोमती के घर चोरी छुपे आने जाने का सिलसिला शुरू हो गया। चाहे दिन में हो या रात में वह रिवीजन करने पहुंच ही जाता। इस बीच प्यार की बड़ी बड़ी कसमें भी बड़ी आसानी से दोनो ने खाए। कई वादे किए दोनो ने एक दूसरे से लेकिन उन्हें भी शायद पता था कि वादे अक्सर तोड़ने के लिए ही किए जाते हैैं। स्कूल का प्यार कम पड़ने लगा तो दोनो ने ट्यूशन क्लास ज्वॉइन कर ली अब तो आदित्य को गोमती के गांव जाने का पर्मनेंट सर्टिफिकेट भी मिल गया। मौका देखते ही उसके घर भी पहुंच जाता। ना जाने कितनी ही प्रैक्टिकल की कॉपी उसके घर लेने गया होगा और दोनो ने ना जाने कितने ही प्रोजेक्ट वर्क किए होंगे।
खैर कहानी इतनी बड़ी है कि अभी और आगे लिखा नहीं जा सकता.... मिलते है कहानी के अगले पार्ट में जिसमें आप पढ़ सकेंगे कि स्कूल के बाद दोनों का आगे क्या हुआ.... शुक्रिया
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