अधूरी मोहब्बत
कुछ लोगों की जिंदगी पल भर में रेत की तरह बिखर जाती हैं तो कोई उसी पल अपनी जिंदगी को नयी दुल्हन की तरह सजा लेता है। स्कूल का वो दौर था और बोर्ड कक्षा का माहौल था, लेकिन उसी कक्षा में कोई अपनी ही धुन पर सवार था। उसे न अपने एग्जाम की चिंता थी न मार्क्स की। यूं तो स्कूली शिक्षा का वह आखरी साल था लेकिन प्यार की कक्षा में उसने अपना पहला कदम अभी अभी ही रखा था। लेकिन इधर उसे उसकी जिंदगी में किसी तूफ़ान के आने के पहले की खामोशी का आभास तक नहीं था। प्यार का परवान सर चढ़ कर बोल रहा था। छः घंटे की कक्षा की पीरियड में प्यार की एक्स्ट्रा क्लास भी लगने लगी थी। इश्क़ का खुमार इतना बढ़ने लगा कि ब्लैक बोर्ड पर पढ़ा रहे लेक्चर क्लास की थ्योरी से ज्यादा फर्स्ट बेंच पर बैठी उसके चेहरे की मासूमियत पर ध्यान था। आग दोनों तरफ लगी थी तो जाहिर सी बात है कि आग के दोनों सिरों को मिलना ही था। एक दिन लंच से पहली की कक्षाएं समाप्त होने के बाद उसे उसने बगल वाले प्रैक्टिकल रूम में बुलाया। गोमंती पहले से ही प्रैक्टिकल रूम में पहुंच चुकी थी और औरंग...